2)भारत को स्वर्ग बना दो
3)साधना का पथ कठिन है
4)रास्ट्र भक्ति ले ह्रदय में
*Geet Ganga के सौजन्य से साभार
अटका कहाँ स्वराज? बोल दिल्ली! तू क्या कहती है? तू रानी बन गयी वेदना जनता क्यों सहती है? ... पथरीली ऊँची जमीन है? तो उसको तोडेंगे. समतल पीटे बिना समर कि भूमि नहीं छोड़ेंगे...समर शेष है, अभी मनुज भक्षी हुंकार रहे हैं .गांधी का पी रुधिर जवाहर पर फुंकार रहे हैं ...समर शेष है, शपथ धर्म की लाना है वह काल.विचरें अभय देश में गाँधी और जवाहर लाल ...समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल व्याध. जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनके भी अपराध [रामधारी सिंह "दिनकर"]
0 comments:
Post a Comment